Mission gaurav UP Board 2022: ,Mission Gaurav kya hai, यूपी बोर्ड का 'मिशन गौरव', कैसे कर सकते हैं रजिस्ट्रेशन ?

  • 'मिशन गौरव'क्या है-(Mission Gaurav kya hai)

'मिशन गौरव'क्या है ,

माध्यमिक शिक्षा परिषद के 100 वर्ष पूरा हो जाने पर  'मिशन गौरव'क्या है-(Mission Gaurav kya hai),मन रहा है.

UP Board 2022: क्या है यूपी बोर्ड का 'मिशन गौरव', कैसे कर सकते हैं रजिस्ट्रेशन ?
UP BORD

किसी भी राष्ट्र की भौतिक समृद्धि, सम्पन्नता और विकास का आधार वहाँ की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर निर्भर होती है। यदि आदर्श उद्देश्यों को जीवन का लक्ष्य बनाया जाए तो मनुष्य, समाज और राष्ट्र की अन्तः चेतना भी अत्यन्त बलवती होती जाती है। मानव युग हमेश ' प्रश्न - पक्ष ' रहा है, तो शिक्षा ' उत्तर-पक्ष '। ऐसी स्थिति में शिक्षा के व्यावहारिक एवं सैद्धान्तिक ज्ञान को प्राप्त करने के लक्ष्य में माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश की भूमिका अत्यन्त महत्त्वपूर्ण रही है। यह संस्था अपने स्थापना वर्ष से वर्तमान समय तक अपने ध्येय वाक्य ' उत्तम शिक्षा, स्वच्छ परीक्षा और स्वस्थ राष्ट्र ' को चरितार्थ करते हुए अपने मूल स्वरूप को प्राप्त करने में निरन्तर सफल रही है। एक तरफ तो इस संस्था ने भारत भूमि की एक बहुत बड़ी आबादी को शिक्षित किया है तो दूसरी तरफ अपनी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं कार्य प्रणाली के आधार पर अनगिनत प्रतिभाओं को निखार करके देश-विदेश के महत्त्वपूर्ण पदों एवं सेवाओं के योग्य बनाया है।

माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज ने वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा के अनुरूप भौतिक एवं शैक्षणिक स्तर पर पर अपनी उपलब्धियों और कार्यप्रणाली को परिवर्द्धित और परिमार्जित करने के लिए अपने प्रशासनिक और भौतिक संसाधनों को क्रमशः समय-समय पर नया आयाम देते हुए ' शून्य से शिखर तक ' का लक्ष्य प्राप्त किया है। संयुक्त प्रान्त अथवा वर्तमान उत्तर प्रदेश में हाईस्कूल तथा इण्टरमीडिएट शिक्षा पद्धति का विनियम और पर्यवेक्षण करने के संबंध में माध्यमिक शिक्षा परिषद की स्थापना हेतु इण्टरमीडिएट शिक्षा अधिनियम- 1921 बनाया गया

1923 में माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा हाईस्कूल और इण्टरमीडिएट परीक्षाओं का सफलतापूर्वक संचालन किया गया। माध्यमिक शिक्षा परिषद की कार्य पद्धति में विस्तार होने पर 1973 में क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ की; 1978 में क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी की 1981 में क्षेत्रीय कार्यालय बरेली की; 1987 में क्षेत्रीय कार्यालय प्रयागराज की एवं 2017 में क्षेत्रीय कार्यालय गोरखपुर की स्थापना की गयी। छात्रहित और पाठ्यक्रम की सर्वसुलभता की स्थिति को देखते हुए प्रथम बार ‘पत्राचार एवं सतत् शिक्षा संस्थान के परीक्षार्थियों‘ को बोर्ड की इण्टरमीडिएट परीक्षा में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों के रूप में शामिल किया गया।

माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज ने आवश्यकतानुसार अपनी कार्य प्रणाली के संवर्द्धन के लिए अपने भौतिक परिवेश के विकेन्द्रीकरण के साथ-साथ शिक्षा को वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा के योग्य गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए क्रमशः अपनी परीक्षा प्रणाली, पाठ्यक्रम, उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन एवं परीक्षा- परिणाम तैयार करने के लिए भी समय-समय पर महत्त्वपूर्ण बदलाव करते हुए नया कीर्तिमान बनाया है। उदाहरण के लिए कहा जा सकता है कि 1979 में प्रदेश के सभी जिलों का परीक्षाफल कम्प्यूटर द्वारा तैयार कराया गया, कक्षा 9 एवं 11 के छात्र-छात्राओं के परीक्षापूर्व अग्रिम पंजीकरण कराने की व्यवस्था लागू की गयी। 2010 से परीक्षार्थियों के हित को देखते हुए इम्प्रूवमेंट/कम्पार्टमेंट/क्रेडिट सिस्टम परीक्षा व्यवस्था भी लागू की गयी।

2017 में परिषद की कुल 9 सेवाएं जनहित गारण्टी अधिनियम 2011 से आच्छादित की गयी। सत्र 2018-19 से छात्र हित को देखते हुए शिक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत करने के लिए कक्षा 9, 10, 11 एवं 12 तक के प्रमुख विषयों में एन.सी.ई.आर.टी. का पाठ्यक्रम लागू किया गया तथा बोर्ड परीक्षा की शुचिता को पारदर्शी बनाये जाने के लिए परीक्षा केंद्रों पर सी0सी0टी0वी0 कैमरों की निगरानी में परीक्षाएँ आयोजित करायी जाने लगी।






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Thank you

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